प्रॉक्सिमिटी सेंसर क्या होता है? इसके उपयोग।

प्रॉक्सिमिटी सेंसर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। जो किसी वस्तु को बिना भौतिक संपर्क किए उस वस्तु की मौजूदगी और गैर मौजदूगी का पता लगाये अर्थात उसकी दिशा में परिवर्तन कर दे। प्रॉक्सिमिटी सेंसर का उपयोग उद्योगों में किया जाता है। इनके कुछ उदाहरण है 
* दरवाजे के पास जाने से पहले दरवाजे का खुल जाना 
*रेलवे स्टेशन, मॉल में लगी सीढ़ियों के पास जाने पर अपने आप चलने लग जाना 
*मोबाइल फ़ोन में proximity सेंसर फोन के डिस्प्ले के पास लगी होती है जैसे हम बात करने के लिए फोन को कान के पास लेकर जाते हैं उसकी स्क्रीन अपने आप ऑफ हो जाती है ये प्रॉक्सिमिटी सेंसर लगे होने के कारण होता है।

प्रॉक्सिमिटी सेंसर के प्रकार:----
(1) इंडक्टिव प्रॉक्सिमिटी सेंसर 
(2) कैपेसिटिव प्रॉक्सिमिटी सेंसर 
(3) फोटो इलेक्ट्रिक सेंसर 

(1)  इंडेक्टिव प्रॉक्सिमिटी सेंसर: ----
इंडेक्टिव सेंसर का उपयोग कई प्रकार के उद्योगों में किया जाता है यह केवल मैटल को ही सेंस करता है जैसे लोहा, एल्यूमिनियम, कॉपर आदि।


इंडेक्टिव प्रॉक्सिमिटी सेंसर का सिद्धांत 
इंडेक्टिव सेंसर फ़ैरडे केनियम के सिद्धांत पर काम करता है इस सेंसर को मैने चार भागो में बांट रखा है जैसे:coil,oscilator,schmitt trigger , output amplifier सेंसर को 24vdc सप्लाई दी जाती है तो इसके ऑस्किलेटर में हाई फ्रीक्वेंसी जनरेट होती है जो क्वाइल को मैग्नेटिक फील्ड जनरेट के लिए इशारा करती है जब कॉइल अपने चारों तरफ मैग्नेटिक फील्ड उत्पन कर देती है तो अब कोई मैटेलिक वस्तु इस चुंबकीय क्षेत्र में आती है तो उस ऑब्जेक्ट या वस्तु में एडी करेंट उत्पन्न होने लग जाता है और उस मैग्नेटिक फील्डको जनरेट होने का विरोध करने लग जाती है जिससे कि ऑस्किलेटर का आयाम (amplitude) कम हो जाता है जिससे कि मैग्नेटिक फील्ड जनरेट नहीं कर पाता है और जैसे जैसे वस्तु magnetic फील्ड नजदीक आती है ऑस्किलेटर का amplitude और कम हो जाता इस तरह schmitt ट्रिगर oscilator की इस मूवमेंट अर्थात इसमें हुए परिवर्तन को पता लगाता है और आऊटपुट एंप्लीफायर को सिग्नल देता है इस तरहआउटपुट एंप्लीफायर इस सिग्नल से लोड को चालू और बंद करता है। ये इंडक्शन वाले गुण केवल धातु में ही पाए जाते हैं इसलिए इससेंसर का उपयोग मुख्य रूप से धातु के लिए किया जाता है 
(1) इसका उपयोग प्लास्टिक, रबर,या अन्य गैर धातु वस्तुओं का पता लगाने के लिए नहीं किया जाता है ।
(2) इंडेक्टिव सेंसर धूल भरे वातावरण में सही तरीके से काम करते हैं।
(3) कोई जरूरी नहीं है कि प्रॉक्सिमिटी सेंसर सीधे संपर्क में आने वाली वस्तुओं को ही सेंस कर ओ घूमती हुई वस्तु को भी सेंस कर लेती है।
(4) जब सेंसर के संवेदनशील प्वाइंट के सामने कोई वस्तु नहीं होगी तो उसकी LED संकेत नहीं देगी 
(5) जब सेंसर के सामने कोई वस्तु होती है तभी ओ वस्तु की उपस्थिति को दर्शाती है।
सेंसर में ऑस्किलेटर क्या होता है 
सेंसर में ऑस्किलेटर को डायरेक्ट करेंट से विद्युत धारा दी जाती है और यह एक बदलती हुई अल्टरनेटिक करेंट उत्पन्न करती है जिससे क्वाइल अपने चारों तरफ चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होती है।
ट्रिगर का काम होता है ऑस्किलेटरों में परिवर्तन को समझना और आउट पुट सिग्नल देना।

    Capacetive proximity sensor:-----
कैपेसिटिव सेंसर वह सेंसर होता है जो किसी वस्तु को बिना संपर्क किए उसकी मौजदूगी तथा गैर मौजदूगी का पता लगा लेता है और उसकी दिशा में परिवर्तन कर देती है । बड़ी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह सेंसर मैटल और नॉन मैटल दोनों को सेंस करती है नॉन मैटल में जैसे लकड़ी, रबर,प्लास्टिक,ऑयल, सीसा, आदि।
 कार्य करने का सिद्धांत:----
कैपेसिटिव सेंसर इंडेक्टिव सेंसर की तरह होता हैऔर ये कैपेसिटेंस के सिद्धांत पर कार्य करती है ये भी चार भागो में बाटा गया है बस इसमें क्वाइल की जगह कैपेसिटर लगा हुआ है इसी कारण इसका नाम कैपेसिटिव सेंसर कहते है जैसे output amplifeire,schmitt trigger,oscilatore,capacitor अंतर यह है कि इंडेक्टिव सेंसर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड जनरेट करती है और केवल मैटल को सेंस करती है, कैपेसिटिव सेंसर में electrostatic फील्ड जनरेट होती है और ये मैटल और नॉन मैटल दोनों को सेंस करती है जैसे: लकड़ी प्लास्टिक आदि। चित्र में कैपेसिटर सेंसर को तीन भागों में बंटा गया है जिसमें सेंसर के सर्फेस के साथ oscilator के साथ ही कैपेसिटर लगा हुआ है जिसके कारण इसका नाम कैपेसिटिव सेंसर पड़ा।oscilator हाई फ्रीक्वेंसी जनरेट करती और इसी के कारण कैपेसिटर अपने आस - पास electrostatic फील्ड जनरेट करती है जैसे कि चित्र में दिखाया गया है  जैसे- जैसे वस्तु उस फील्ड के क्षेत्र में आती है तो oscilatore को electrostatic फील्ड जनरेट करने में ज्यादा दबाव पड़ता है और इसका आयाम कम होता जाता है एक निश्चित सीमा पर जाकर इसका आयाम बहुत कम हो जाता है जिसके कारण oscilator बंद हो जाता है और इस oscilator में हो रहे परिवर्तन को स्मिट ट्रिगर रीड करता है और सिग्नल आउटपुटएंप्लीफायर को भेजता है और आऊटपुट लोड को चालू और बंद करता है ।

फोटो इलेक्ट्रिक्सेंसर:- - - 
यह एक ऐसा उपकरण है जो प्रकाश का इस्तेमाल करके वस्तु को महसूस करता है वस्तु की उपस्थिति और अनुपस्थित का पता लगाता है। यह बाहरी प्रकाश का इस्तेमाल नहीं करता है। ये तीन प्रकार के होते हैं:- - - 
1.Through beam sensor 
2.Retro reflective sensor 
3.Diffuse reflective type sensor 
     
          (Through beam sensor)
थ्रो बीम सेंसर एक ऐसा सेंसर है जो प्रकाश के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसमें एक एमेटर ट्रांसमीटर होता है जो प्रकाश उत्पन्न करता है दूसरा रिसीवर जो प्रकाश को प्राप्त करता है यह प्रकाश सीधी रेखा में होता है जो रिसीवर की तरफ जाता है जब इनके बीच मे कोई वस्तु आ जाती तो प्रकाश को रिसीवर तक पहुंचने में बाधित करता है तो रिसीवर प्रकाश की अनुपस्थित का पता लगा लेता अर्थात वस्तु को डिटेक्ट करके आउटपुट को सिग्नल प्रदान करता है कि कोई वस्तु बीच में आ गई है इसके अनुसार आउटपुट लोड को चालू और बंद करता है थ्रो बीम सेंसर के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें 

* थ्रो बीम सेंसर अपने लम्बी रेंज के लिए पहचाना जाता है। इसका उपयोग अक्सर ऑटो मोटिव और पैकेजिंग मशीनों जैसे उद्योग में किया जाता है। यह सेफ्टी के तौर पर भी काम में लाया जाता  है।
*थ्रो बीम सेंसर में ट्रांसमीटर और रिसीवर एक दूसरे के बिल्कुल सीधे में लगा होना चाहिए नहीं तो आउटपुट देने में विफल हो जाएगा।
*आउटपुट सिग्नल सेंसर के प्रकार पर निर्भर करता पॉजिटिव (+) दे रहा है या नेगेटिव (-) हमने सर्किट को कैसे चलाना है।
*इनका रख रखावकरने की आवश्यकता कम ही पड़ती है।
*यह प्रदूषित तथा नमी वाले स्थान पर सही ढंग से काम करता है 
         
             ( Retro reflecter type sensor)
रेट्रो रिफ्लेक्टिव सेंसर में ट्रांसमीटर और रिसीवर एक ही डिवाइस में बने होते हैं तथा इनकी सीधी रेखा में एक रिफ्लेक्टर लगा होता है जो कांच या फिर किसी चमकदार वस्तु की हो सकती है। जब ट्रांसमीटर से प्रकाश निकल कर रिफ्लेक्टर पर पड़ती है तो रिफ्लेक्टर प्रकाश को परिवर्तित कर देती है जब यह प्रकाश वापस रिसीवर पर नहीं जा पाती किसी वस्तु के बीच मे आ जाने से तो रिसीवर सिग्नल आउटपुट को देता है कि कोई वस्तु बीच में आ गई है इसके अनुसार ही आउटपुट लोड को चालू और बंद करता है। 
उपयोग:- - - 
इसका उपयोग अप्रकाशित सड़कों और जल मार्ग के चीन्हो के रूप में किया जाता है।
       
        ( Diffuse reflecter type sensor)
डिफ्यूज रिफ्लेक्टर सेंसर में ट्रांसमीटर और रिसीवर एक ही हाउसिंग में बने होते है इनको रिफ्लेक्टर की आवश्यकता नहीं होती है इस सेंसर की पहचान सीमा निश्चित होती है। क्योंकि यह ओबजेक्ट के आकार और रंग इसको प्रभावित करता है रिसीवर कितनी अच्छी तरह से प्रकाश को रीड कर सकता है।
*जब सेंसर का ट्रांसमीटर प्रकाश उत्सर्जित करता है तो यह प्रकाश आमतौर पर लाल रंग का होता है 
*जब प्रकाश की किरण वस्तु पर पड़ती है तो परिवर्तित होकर सेंसर के रिसीवर पर वापस लौटती है तो सेंसर परिवर्तित प्रकाश की किरण की गति को मापती है कि कितनी गति से प्रकाश की किरण वापस रिसीवर पर आती है।
*यदि वस्तु प्रकाश की किरण की तरफ बढ़ती है तो सेंसर स्विचिंग सिग्नल हो जाती है जिस से लोड चालू और बंद होता है।
फोटो इलेक्ट्रिक सेंसर में एक खास बात जानना बहुत ही जरूरी है light on mode और dark on mode 

लाइट ऑन मोड जब ट्रांसमीटर और रिसीवर के बीच मे वस्तु आ जाती है तो सेंसर की लाइट बंद हो जाती है तब रिसीवर अपनी आउटपुट सिग्नल दे देता है ।
डार्क ऑन मोड जब ट्रांसमीटर और रिसीवर के बीच मे कोई वस्तु आ जाती है तो सेंसर की लाइट ऑन हो जाती है तब रिसीवर अपनी सिग्नल दे देता है जिसके कारण लोड चालू और बंद हो जाती है यह मशीन के ऑपरेशन पर निर्भर करता है की कैसे वर्क कराना है।यह सैटिंग ट्रांसमीटर के ऊपर पिन सेट लगा होता है चित्र में दिखाया गया है ।ये सेंसर npn और pnp हो सकते कौन सा आयोग में लाना है ये plc के कार्ड रिले पर निर्भर करता है 

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