बल्ब क्या है?what is blub?

1.बल्ब (blub):- - - 
बल्ब एक कृत्रिम प्रकाश उत्सर्जित करने वाला यंत्र है। लाइट एक ऐसी शक्ति है जो उन वस्तुओं द्वारा रेडियट की जाती है जिनका तापमान बढ़ाया जाता है। ठोस वस्तुओं को गर्म करके बनावटी लाइट पैदा की जाती है। जब वस्तुएं रूम टेंप्रेचर से ऊपर गर्म की जाती हैं तो वे अपने चारों तरफ एनर्जी रेडियट करना शुरू कर देती हैं। ये इतना गर्म हो जाती हैं कि वेव में बदल जाती हैं कि इनका फिलामेंट नहीं दिखता है।2.बल्ब से जुड़ी कुछ जरूरी बातें:- - -
1. बल्ब का फिलामेंट टंग्स्टन का बना होता है। इसका ग्लनांक बिंदु (melting point)3500°C होता है।
2. इसका स्पेसिफिक रेजिस्टेंस 60माइक्रो ohm प्रति घन सेंटीमीटर होता है।यह आसानी से 2300°पर काम कर सकता है। ऊपर चित्र में टंगस्टन फिलामेंट लैंप दिखाया गया है।
3. इसमें आर्गन गैस होता है क्योंकि यह निष्क्रिय होती है आग के साथ को क्रिया (reaction) नही करता है।
4. छोटे मोटे लैम्पों में गैस नहीं भरी जाती है (25w) लेकिन अधिक वोल्टेज (40w या इससे ऊपर)वाले लैम्पों में गैस भरना जरूरी है।
5. वायु रहित लैंपो का तापमान 2000°C से अधिक नहीं किया जा सकता नहीं तो फिलामेंट का मॉल उड़ने लगता है। इसीलिए इसमें ऑर्गन या नाइट्रोज गैस भरते हैं ।
6. इसकी खोज थॉमस एडिसन ने 1879 में किया था।
3. बल्ब के प्रकार:-----
1. कार्बन फिलामेंट लैंप.
2. टंगस्टन फिलामेंट लैंप.
3. सोडियम वैपर लैंप.
4.हाई प्रेशर मरकरी लैंप.(H.P.M .V)
        ।. मरकरी आर्गन एंड टंगस्टन टाइप.
         ।।.M.B टाइप.
5. फ्लोरोसेंट लैंप।
कार्बन फिलामेंट लैंप:- - - 
यह अधिकतर ताप देने के काम आता है रोशनीकरण के लिए नहीं। इसका फिलामेंट कार्बन का बना होता है। इसका गलनांक बिंदु 3500°C तक होता है लेकिन कार्य करने का तापमान 1800°C से अधिक नही होना चाहिए नहीं तो कार्बन खंडित होना शुरू हो जाएगा। बल्ब के अंदर की ओर का हिस्सा काला होना शुरू हो जाएगा।यह पीलेपन की रोशनी देता है। इसका खर्चा बहुत ज्यादा है। लैंप की दक्षता बहुत कम है 2.5 से 4 ल्यूमेन प्रति वॉट है।

टंगस्टन फिलामेंट लैंप :- - 
फिलामेंट के लिए टंगस्टन बहुत ही अच्छा धातु है जो कि एक अच्छा फिलामेंट के लिए सारी आवश्यकताएं पूरी करता है। इसका गलनांक बिंदु 3400°C है जो कि बहुत ज्यादा है।
उपयोग:- - - 
1. इसका उपयोग घरों कारखानों तथा कमर्शियल जगहों पर किया जाता है,`सस्ती होने के कारण।

सोडियम वैपर लैंप:---
ऐसे लैम्पों की प्रति यूनिट रोशनी कम होती है इसलिए लैम्पों की लम्बाई अधिक होती है। आवश्यकता लम्बाई पाने के लिए इनको U आकृति में बनाते हैं।दो ऑक्साइड चढ़े इलेक्ट्रोड ट्यूब के दोनों सिरों को बंद कर देते हैं। ट्यूब के अंदर नियॉन गैस भरी होती है । कार्य शुरू होने से पहले सोडियम ठोस अवस्था में पड़ी रहती है तथा दीवारों के साथ चिपकी रहती है। स्विच ऑन करते ही lamp कम प्रेशर नियॉन की तरह काम करती ही है तथा गुलाबी रंग की रोशनी देता है इससे लैंप गर्म होने लगता है और सोडियम वाष्प में बदल जाता है और 5- 10मिनट के बाद पीली रोशनी देने लगता है। 40वॉट डिस्चार्ज लैंप को स्टार्ट करने के 150vlot की स्ट्रीकिंग vlot की जरूरत होती है तथा 100 वॉट लैंप के लिए 450 वोल्ट। ऐसे ट्रांसफार्मर को नो लोड पर वोल्टेज की ज्यादा जरूरत होती है जैसे- जैसे लैंप की रोशनी बढ़ती जाती है वैसे - वैसे वोल्टेज कम होती जाती है।
उपयोग:- - - 
1. इसका उपयोग गलियों में रौशनी के लिए किया जाता है।
खराब:- - - 
1. इसकी आयु तब समाप्त होती है जब जब फिलामेंट जल जाते हैं।
2. एनोड इलेक्ट्रॉन निकलना band कर देता है।
नोट:----   
इस लैंप को खड़ा टांगना चाहिए नहीं तो सोडियम अंदर के हिस्से को काला कर देती है।
मरकरी आर्गन एंड टंगस्टन टाइप:- - - - 
इस टाइप के लैंप 300 से 600वॉट तथा 200 से 250वोल्ट तक एसी. तथा डीसी. दोनो सप्लाई के लिए बनते हैं। यह लैंप भी M.B टाइप लैंप की तरह होता है लेकिन बाहरी ट्यूब बिल्कुल वायु रहित न रखकर उसमें साधारण लैंप की तरह फिलामेंट लगा होता है जो कि ट्यूब के सीरीज से होता है और वह ब्लास्ट चोक की तरह काम करता है। इसलिए यह लैंप एसी और डीसी. दोनो सप्लाई पर काम करता है और पूरी लाइट फिलामेंट के द्वारा एक लाल सी रौशनी होती है। साथ साथ मे डिस्चार्ज टयूब भी गर्म होती रहती है और खास समय के बाद जब पूरा टेंप्रेचर पूरा हो जाता है तो लैंप से लगे एक थर्मल स्विच से फिलामेंट का कुछ भाग कट जाता है जिससे ट्यूब पर अधिक वोल्टेज आ जाती है और ट्यूब जल उठती है।
लाभ:- - - - - 
1. इसका लाभ यह है कि यह दो प्रकार के रंगों की रोशनी मिलाकर देता है।
2. इस प्रकार की रोशनी बहुत ही ठंडी और सुहावनी होती है।
 मरकरी आर्गन एंड टंगस्टन टाइप लैंप।

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